Apr 5, 2012

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पाली वासियों ने बिछाए पलक पावडे


पाली वासियों ने बिछाए पलक पावडे 
Thursday, 05 Apr 2012 

पाली। ०४ अप्रेल २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो 
आचार्य महाश्रमण की अहिंसा यात्रा का बुधवार को सोजत रोड स्थित रूप रजत विहार पहंुचने पर स्वागत किया गया। सैकडों की तादात में मौजूद श्रद्धालुओं ने गुरू को शीश झुकाकर नमन करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। अनेक मुनि व साघ्वियों के साथ पहंुचे आचार्य ने प्रवचन किए।
पांच दिवसीय प्रवास के तहत पाली पहंुचे महाश्रमण के सान्निध्य में अपराह्न साढे तीन बजे बांगड कॉलेज से नशा मुक्ति रैली निकाली गई। रैली अहिंसा द्वार, सूरजपोल व टाउन हॉल होते हुए वीर दुर्गादास नगर पहंुची। रैली में शामिल लोग नशा मुक्ति के साथ इससे होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी देती तख्तियां लेकर चल रहे थे। आगामी आठ अपे्रल तक आयोजित विभिन्न कार्यक्रमाें में महाश्रमण का सान्निध्य रहेगा। नौ अप्रेल को सुबह वह बालोतरा की तरफ प्रस्थान करेंगे।


दर्शन को व्याकुल रहे
चारों तरफ उल्लास और उमंग..., गुरूवर के दर्शनों को व्याकुल श्रद्धालु..., अहिंसा यात्रा की चर्चाएं..., आचार्य महाश्रमण के व्यक्तित्व के बारे में बतियाते लोग... कुछ ऎसा ही नजारा बुधवार को रूप रजत विहार में देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालु महाश्रमण के दर्शन लाभ लेने के लिए उतावले नजर आए। अहिंसा यात्रा के पाली पहंुचने से पहले ही श्रद्धालु कार्यक्रम स्थल पर पहंुचना शुरू हो गए। मुख्य द्वार के बाहर खडे लोगों की नजरें रह-रहकर सडक की तरफ उठती रही। यात्रा के पहंुचने से पहले मुनियों व साघ्वियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। लोग उनका हाथ जोडकर व शीश झुकाकर नमन करते रहे। महाश्रमण के आगमन के साथ ही वातावरण जयकारों से गूंज उठा।

सजे स्वागत द्वार
आचार्य के स्वागत में जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए। रूप रजत विहार, ट्रांसपोर्ट नगर, नया गांव, सैनिक कल्याण बोर्ड, सुन्दर नगर चौराहा, बांगड कॉलेज, नहर पुलिया व अहिंसा द्वार तक स्वागत द्वार बनाए गए। साथ ही आचार्य के बडे-बडे होर्डिüग्स लगाए गए।
चाक-चौबंद व्यवस्थाएं
कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं के बैठने के लिए विशाल शामियाना लगाया गया। इसमें महिला व पुरूषों के बैठने की अलग-अलग व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल के साथ भोजन की व्यवस्था की गई। सुरक्षा के चलते पुलिस के जवान तैनात रहे।

'आत्मा को मलिन बनाती है माया'
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि माया व्यक्ति की आत्मा को मलिन बनाती है। माया अविश्वास में रमण करने का स्थान है। जिनके पास माया होती है उसके पास सच्चे मित्रों की कमी होती है। वे बुधवार सुबह सोजत रोड मार्ग स्थित रूप रजत विहार में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरलता व निश्चलता का जीवन जीने वाले व्यक्ति पवित्र होते हैं। महात्माओं के जो मन में होता है वही वाणी व आचरण में होता है। उन्होंने नादानी को परिभाषित करते हुए कहा कि बच्चा सरल व नादान होता है। उसे सांप व अग्नि का ज्ञान नहीं होता।
लेकिन, यही नादानी युवक करता है तो वह नादानी नहीं कहलाएगी। ज्ञान, दक्षता, सच्चा व किसी को धोखा नहीं देने वाला व्यक्ति अत्यन्त विशिष्ट होता है। धर्म के क्षेत्र में सरलता का महत्व है। निर्वाण वह प्राप्त करता है जिसके ह्वदय में धर्म होता है। ह्वदय में धर्म को रखने वाला व्यक्ति शुद्ध होता है। कुटिलता से बचते हुए व्यक्ति को सच्चाई को आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए। व्यक्ति को रात्रि में सोने से पहले आत्मचिंतन करना चाहिए। इससे पूर्व मुनि सुमेरमल ने कहा कि केवल सांस लेने से अपने आपको जीवित मान लेना पर्याप्त नहीं है। लक्ष्य के साथ गतिशील रहने वाला व्यक्ति जीवंत व्यक्तित्च का धनी होता है।
व्यक्ति को बाहर व भीतर की वृत्तियाें से अनासक्त बने रहना चाहिए। यह कठिन है लेकिन, जो व्यक्ति बाहर की क्रिया करते हुए अनासक्त रहता है, वह व्यक्ति प्रगति करते हुए निवृत्ति का आनन्द लेने लग जाता है। उन्होंने कहा कि सुविधा व अहंकार में व्यक्ति उलझते हुए भटक जाता है। अहम सुविधा का ऎसा आकर्षण है मानो तलवार की धार पर शहद लगा दिया गया हो। उन्होंने गृहस्थ रहते हुए अन्र्तमुखी बनने की सीख दी। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति के मुख्य संयोजक भैरचंद गोगड, संयोजक मंत्री डूंगरचंद चौपडा, तेरापंथी सभा के मंत्री बाबूलाल चौपडा, महेंद्र चौपडा समेत बडी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं व समाजबंधु मौजूद रहे।

'अहिंसा व नैतिकता की देवी रखें साथ'
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में देवताओं की तस्वीरें लगाई जाती हैं। लेकिन, इनके साथ नैतिकता व अहिंसा की देवी को भी साथ रखना चाहिए। व्यवहार में अहिंसा व व्यापार में नैतिकता का समावेश होना चाहिए। वे बुधवार रात वीडी नगर में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संत सभी के होते हैं। संतोंं द्वारा दिए गए उपदेश को जीवन में उतारने से उपदेश की सार्थकता सिद्ध होती है। नशा मुक्त समाज, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, साम्प्रदायिक सद्भाव व यथा संभव ईमानदारी के पालन का संदेश देना अहिंसा यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। इससे पहले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला कलक्टर नीरज के. पवन ने कहा कि वर्तमान में नशा मुक्त समाज व कन्या भ्रूण हत्या रोकना अत्यन्त आवश्यक है।
ऎसे में अहिंसा यात्रा से अवश्य ही लोगों का ह्वदय परिवर्तन हुआ होगा। उन्हाेंने महाश्रमण से पाली में चातुर्मास करने का निवेदन किया। विधायक ज्ञानचंद पारख ने कहा कि सिद्ध पुरूष परमात्मा के लिखे भाग्य को भी बदल देता है। महाश्रमण भी ऎसे ही सिद्ध पुरूष हैं। घर बैठे आई अहिंसा रूपी गंगा से श्रावकों की दिशा तय कर दी है। नागरिक अभिनंदन समिति के संयोजक नगर परिषद सभापति केवलचंद गुलेच्छा ने नशा मुक्ति को आवश्यक करार दिया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य को नागरिक अभिंनदन पत्र दिया गया। साथ ही अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बडी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे।

आचार्य ने दिया नशा मुक्ति का संदेश
तम्बाकू और नशीले पदार्थ जीवन को नष्ट कर देंगे। स्वस्थ जीवन के लिए नशे से मुक्ति पाना जरूरी है। इसी संदेश के साथ आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में शहर के प्रमुख मार्गोü से नशा मुक्ति रैली निकाली गई। रैली शहर के बांगड कॉलेज परिसर के समीप से रवाना हुई। जो कॉलेज रोड, अहिंसा द्वार, सूरजपोल चौराहा, टाउन हॉल से वीर दुर्गादास नगर स्थित आयोजन स्थल पहुंची। यहां पंडाल में श्रावकों को संबोधित करते हुए आचार्य महाश्रमण ने कहा कि नशा इस सम्पूर्ण जीवन का नाश कर रहा है। युवाओं को भी नशे की लत लगने से समाज में अंधकार छा जाएगा। उन्होंने समाजजनों खास तौर पर युवाओं से नशे को छोडने की बात कही। इस मौके पर रैली संयोजक महेन्द्र चौपडा, अनिल भंसाली, गौतम गोगड, सुरेश नाहटा, सुरेश चौपडा, रवि चौपडा, कपिल बालहट सहित काफी तादाद में लोग उपस्थित थे।

उमड पडा जन-सैलाब
शाम करीब चार बजे जैसे ही आचार्य महाश्रमण रैली उद्गम स्थल पहुंचे तो माहौल पूरी तरह से बदल गया। आचार्य का संदेश अहिंसा और नशा मुक्ति जैसे शरहवासियों के सिर चढ कर बोल रहा था। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी हाथ में तख्तियां लेकर यही संदेश दे रहे थे। रैली जैसे ही शहर के व्यस्ततम सूरजपोल चौराहे पहुंची ऎसा लगा मानो आचार्य के इस प्रेरणाकार्य में मानो पूरे शहर ने सहमति देकर सफल बनाने का प्रण लिया हो।

तख्तियों से दिया संदेश
नशा मुक्ति रैली के दौरान 'अगर करेंगे मद्यपान समाज में होगा अपमान..., 'मदिरा पान छोड दो, जीवन अपना मोड दो... जैसे नारे लिखी तख्तियां लोगों ने थाम रखी थी। यहां स्कूली छात्राओं सहित तेरापंथी महिला और कन्या मंडल की सदस्याएं उपस्थित थीं।

धवल सेना ने दिया संदेश
बांगड कॉलेज से आचार्य महाश्रमण और उनकी धवल सेना नशा मुक्ति का संदेश देती रवाना हुई। इसके बाद मार्ग में पग-पग पर यात्रा का स्वागत किया गया। यात्रा में तेरापंथ समाज के लोग लाउड स्पीकर और भजनों के द्वारा भी अहिंसा और नशा मुक्ति का संदेश दे रहे थे।
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Apr 5, 2012, 4:25:00 PM

yha ka drshya dekh man khush ho gya . ek din kolkata walo ka bhi ye din aayega ki janta eese hi gurudev ke swagat main palk bichheye darshano ki pyasi janta khil uadegi

Terimakasih hardikoswal atas Komentarnya di पाली वासियों ने बिछाए पलक पावडे
Apr 5, 2012, 4:25:00 PM

yha ka drshya dekh man khush ho gya . ek din kolkata walo ka bhi ye din aayega ki janta eese hi gurudev ke swagat main palk bichheye darshano ki pyasi janta khil uadegi

Terimakasih hardikoswal atas Komentarnya di पाली वासियों ने बिछाए पलक पावडे

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