May 17, 2012

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मनुष्य जन्म में ही संभव बोधि की प्राप्ति: आचार्य श्री महाश्रमण


मनुष्य जन्म में ही संभव बोधि की प्राप्ति: आचार्य श्री महाश्रमण
बालोतरा १७ मई २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो के लिए
नए तेरापंथ भवन में बुधवार को आयोजित धर्मसभा में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मनुष्य को सत पुरुषार्थ व साधना करनी चाहिए ताकि वह दुर्लभ बोधि को प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन ही ऐसा जीवन है जहां प्राणी बोधि को प्राप्त कर सकता है, लेकिन यह मनुष्य जीवन दुर्लभ है। जिस जीव को यह मनुष्य जीवन मिलता है उसे ज्ञान दर्शन व चारित्र रूपी संपूर्ण बोधि प्राप्त करने का पराक्रम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में साधना का अवसर मिलता है और इससे पूर्व ही मृत्यु हो जाए तो शेष साधना के लिए वापिस मनुष्य योनि प्राप्त होती है। मनुष्य योनि का बार-बार मिलना शुभ कर्मों का योग होता है। इसलिए व्यक्ति आगम स्वाध्याय आदि करे ताकि बोधि को और अधिक निर्मल होने का मौका मिलता है। आचार्य ने प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति मानव जीवन से लाभ उठाने का प्रयास करे और दुर्लभ बोधि को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहे।

मंत्री मुनि सुमेरमल ने कहा कि अध्यात्म के क्षेत्र में आगे बढऩे वाले व्यक्ति को व्यवहारिक धरातल व पदार्थों के प्रति आसक्ति को कम करना जरूरी है। कार्यक्रम की शुरुआत में मुनि विजय कुमार ने 'बन स्यूं शिव पद वासी रे' गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन मुनि हिमांशु कुमार ने किया।
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