Popular Posts

Random Post

Showing posts with label Ladnun. Show all posts
Showing posts with label Ladnun. Show all posts

Apr 25, 2012

व्रत हैं संयम का प्रतीक -मुनि धनंजयकुमार


२३ अप्रेल २०१३ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो -समृधि नाहर

व्रत संयम त्याग - ये भारतीय संस्कृति के प्रतीक शब्द हैं। आध्यात्मिक विकास की दृष्टि से इन शब्दों का महत्व अतुलनीय हैं। व्रत जीवन का सुरक्षा कवच हैं। वर्तमान युग की समस्याओं का समाधान व्रत चेतना को जगा कर किया जा सकता हैं- ये विचार स्थानीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आयोजित चौदह नियम कार्यशाला के अवसर पर मुनि धनंजयकुमार ने व्यक्त किए। सही अर्थ में श्रावक बनने की प्रेरणा देते हुए मुनिश्री ने कहा - श्रावक वही हैं जिसके जीवन में व्रत के अभाव में श्रावकत्व की सुरक्षा नहीं की जा सकती । यदि कोई श्रावक अपने जीवन में एक व्रत अथवा नियम भी अपना ले तो वह अपने जीवन को धन्य बना सकता हैं। ऋषभ द्वार में आयोजित इस कार्यक्रम के प्रथम चरण को सान्निध्य प्रदान करते हुए मुनि ने कहा कि स्वेच्छा से स्वीकृत नियम व्यक्ति के जीवन की एक अनमोल धरोहर होते हैं। अध्यात्म की दिशा में आगे बढऩे वाले व्यक्ति के लिए नियमों को स्वीकार करना अत्यन्त अपेक्षित होता हैं। नियम और व्रत की चेतना को व्यापक बनाने की प्रेरणा देते हुए मुनि धनंजयकुमार ने कहा - ये चौदह नियम आकांक्षाओं को सीमित करने का पंथ प्रशस्त करते हैं भोगोपभोग के समीकरण पर आधारित ये नियम व्यक्ति त्व का रूपान्तरण करने की असीम क्षमता रखते हैं। इनका अनुसरण कर व्यक्ति अपनी विवेक और संकल्प की चेतना को जगाकर कल्याण के मार्ग पर अग्रसर हो सकता हैं। इस अवसर पर मुनि सुधांशकुमार ने गीतिका के माध्यम से यथार्थ जगतï् में जीने की प्रेरणा दी । मुनि मलजयकुमार ने इच्छाओं के परिणाम का महत्व बताते हुए लालसाओं से मुक्त होने की बात कही । कार्यक्रम का दूसरा साध्वी प्रमोदश्री के सन्निध्य में रहा । साध्वीजी ने कहा - ये चौदह नियम व्यक्ति की चेतना को आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के प्रारम्भ में तेरापंथ महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण किया गया ।

आगम मंथन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित


२३ अप्रेल २०१३ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो -समृधि नाहर


जैन विश्वभारती की ओर से आयोजित आगम मंथन प्रतियोगिता का परिणाम सोमवार को घोषित किए गए।
इस मौके पर हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनि धनजंय कुमार ने कहा कि आगम मंथ प्रतियोगिता आगम स्वाध्याय व श्रुत संवर्धन का प्रशस्य उपक्रम है। इससे ज्ञान का विकास होता है तथा नए तथ्यों की उपलब्धि होती है।
प्रतियोगिता संयोजक प्रज्ञा सिंघी ने बताया कि प्रतियोगिता के प्रथम चरण में देशभर से करीब १३०० प्रतियोगियों ने भाग लिया। नंदी सूत्र के आधार पर प्रतियोगिता के द्वितीय चरण में कोलकाता, दार्जिलिंग, जयपुर, बालाघाट, उदयपुर, जोधपुर, नोखा, श्रीडूंगरगढ़, सरदारशहर, छापर, सुजानगढ़, रतनगढ़ व लूणकरणसर आदि क्षेत्रों के चयनित कुल ३४ प्रतियोगियों की सहभागिता रही।
जैन विश्वभारती के निदेशक राजेंद्र खटेड़ ने कहा कि प्रतियोगिता में मोनिका छाजेड़ लूणकरणसर ने प्रथम, ममता सांड व विजयश्री मरोठी ने द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। तीनों विजेताओं को आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में होने वाले समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा।

Apr 18, 2012

आचार्य महाप्रज्ञ की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम

१६ अप्रैल २०१२. चूरू
तेरापंथ धर्म संघ के १०वें आचार्य महाप्रज्ञ की दूसरी पुण्यतिथि के पर सोमवार को जिले में कई जगह प्रार्थना सभाएं हुईं। कार्यक्रमों में आचार्य का गुणनुवाद किया गया। श्रावकों ने नम आंखों से महाप्रज्ञ का स्मरण किया।
 
सुजानगढ़/ छापर .
दस्साणी भवन में जैन श्वेताबंर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद व महिला मडंल की ओर से साध्वी राजीमति के सानिध्य में श्रद्धाजंलि सभा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ महाप्रज्ञ अष्टकम से हुआ। साध्वी कुसुमप्रज्ञा व पुलकित यशा ने श्रद्धाजंलि स्त्रोत प्रस्तुत किया। महिला मंडल की बहनों व साध्वी करुणाश्राी व समताश्री ने गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी राजीमति ने आचार्य महाप्रज्ञ के जीवन से जुड़े संस्मरण बताए। इस मौके पर विमला लोढ़ा, प्रदीप बैद, अंजू मालू, सीताराम दाधीच व सुभाष बेदी ने भी विचार प्रकट किए। संचालन अजय चोरडिय़ा ने किया। इसी क्रम में छापर के भिक्षु साधना केंद्र में मुनि सुमेरमल सुदर्शन के सानिध्य में सभा हुई। मुनि जयंत कुमार, मुनि अनुशासन कुमार, मुनि तन्मय कुमार, अमृत सांसद रणजीत दूगड़, सभा प्रवक्ता प्रदीप सुराणा, आलोक नाहटा, हर्षलता दुधोडिय़ा, यशा दुधोडिय़ा, प्रिया नाहटा व जयश्री दुधोडिय़ा ने विचारों के माध्यम से आचार्य को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

करुणा का दरिया थे महाप्रज्ञ
राजलदेसर.
साध्वी सेवा केंद्र व्यवस्थापिका कैलाशवती के सानिध्य में प्रेक्षा प्रणेता आचार्य महाप्रज्ञ की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम हुआ। साध्वी ने कहा कि गुरुदेव करुणा का बहता दरिया थे। उनमें बचपन से ही करुणा के संस्कार थे। साध्वी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ का पहला संकल्प था कि मैं ऐसा कोई काम नहीं करुंगा जिससे मेरे गुरु को चिंतन करना पड़े। दूसरा मेरे सामने कैसी भी स्थिति आए मैं अपना धैर्य नहीं खोऊंगा। तीसरा संकल्प था कि मैं किसी का अनिष्ट चिन्तन नहीं करुंगा। महाप्रज्ञ ने अपने जीवन में तीनों संकल्पों की अखंड आराधना की। साध्वी ललिताश्री ने महाप्रज्ञ की जन्म स्थली टमकोर गांव को पुण्य धरा बताते हुए कहा कि मुझे भी उस धरा पर जन्म लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। साध्वी गुरुयशा के मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साध्वी प्रभाश्री ने कविता, साध्वी रजतयशा ने गीतिका व महिला मंडल ने गीतिका के माध्यम से श्रद्धांजलि प्रस्तुत की।

आवेश और तनाव से मुक्त थे आचार्य
लाडनूं.
आचार्य महाप्रज्ञ का जीवन जागरूकता और अप्रमाद का अतुलनीय उदाहरण है। वे सदा आवेश और तनाव से मुक्त रहे। ये विचार तेरापंथ धर्म संघ के दसवें अधिशास्ता आचार्य महाप्रज्ञ के महाप्रयाण दिवस पर हुए कार्यक्रम में शासन गौरव मुनि धनंजय कुमार ने व्यक्त किए।
पहली पट्टी स्थित ऋषभद्वार सभागार में हुए इस कार्यक्रम में मुनि कुमार ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ का जीवन अपने आप में एक धरोहर है। उनके समर्पण, पुरुषार्थ और आत्म कर्तव्य की गाथा प्रेरणादायी है। मुनिश्री ने कहा कि वे एक विशिष्ट महायोगी थे। साध्वी रतनश्री ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ एक ऐसे चमत्कारी महासूर्य है जिनके नाम का स्मरण करने से भी चमत्कार घटित हो जाए। समणी मल्लिप्रज्ञा ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ समण श्रेणी के सर्वांगीण विकास के स्वपन दृष्टा थे।
नगर पालिकाध्यक्ष बच्छराज नाहटा ने भी महाप्रज्ञ पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ समणी मृदुप्रज्ञा के मंगलाचरण से हुआ। साध्वी प्रमोदश्री ने महाप्रज्ञ के अवदानों पर प्रकाश डाला। मुनि अक्षय प्रकाश, मुनि मलयज कुमार साध्वी मृदुला कुमारी, साध्वी सूरजकुमारी, साध्वी चांद कुमारी, साध्वी हिमश्री, तेरापंथी सभा के मंत्री राजेश खटेड़ व समणी रमणीय प्रज्ञा ने भी विचार व्यक्त किए। ओसवाल सभा के मंत्री लक्ष्मीपत बैंगाणी व राजूदेवी चौरडिय़ा ने गीतिका प्रस्तुत की। संचालन सुनीता बैद ने

May 5, 2011

छोटी खाटू तपस्वियों का किया अभिनंदन


तपस्वियों का किया अभिनंदन
छोटी खाटू 5 May 2011  (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो )
साध्वी संयम श्री के सानिध्य में ग्रामवासियों एवं अनेक श्रद्धालुओं द्वारा वर्षों से तप कर रही तपस्वियों का अभिनंदन किया गया।

अक्षय तृतीया के उप लक्ष में बुधवार को कस्बे के तेरा पंथ भवन में कार्यक्रम आयोजित कर साध्वी वृंद का चातुर्मासिक प्रदान किया गया। कार्यक्रम में साध्वी संयम श्री के सानिध्य में ग्रामवासियों एवं अनेक श्रद्धालुओं द्वारा वर्षों से तप कर रही तपस्वियों का अभिनंदन किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार तपस्या के इस क्रम में तपस्वी एक दिन निराहार रहते हुए अगले दिन आहार लेता है, यह क्रिया एक वर्ष से अधिक चलता है। पिछले 29 वर्षों से इस तप को इचरज देवी तथा पांच वर्षों से गीता बेताला, प्रेम बेताला और प्रेम सेठिया कर रहे हैं। साध्वी ने बताया कि विभिन्न तपस्याएं का जब वैज्ञानिकों ने प्रयोग शालाओं में शोध किया तो सकारात्मक परिणामों के आधार पर शरीर के गूढ़ रहस्यों को पहचाना तथा बताया कि तपस्या से रोगों को मुक्ति मिलती है। इस अवसर पर ज्ञान शाला के विद्यार्थियों ने प्रथम तीर्थ कार ऋषभ भगवान के जीवन पर आधारित एक भाव भीनी नाटिका की प्रस्तुति दी। इससे अभिभूत होकर मंगल पूर निवासी टीकम चंद जैन और मेड़ता निवासी हस्तीमल जोशी ने ज्ञान शाला के विस्तार के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया। मोहन लाल छाजेड़, प्रेमसिंह चौधरी, कपूरचंद , ताराचंद धारीवाल, गजराज , मंजु मेहता, उम्मेद सिंह मेहता एवं बिजू देवी ने अपने अपने विचार रखें।

शिक्षक पर है नैतिक शिक्षा की जिम्मेदारी : प्रो. मुनि महेंद्र


जैविभा में हुई जीवन विज्ञान से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास विषयक संगोष्ठी
लाडनूं 4 May 2011  (जैन तेरापंथ समाचार ब्योरो )

प्रो. मुनि महेंद्र कुमार ने कहा कि बच्चों को नैतिक शिक्षा देने और उन्हें संस्कारवान बनाने की जिम्मेदारी शिक्षक की है।

वे मंगलावार को जैन विश्व भारती स्थित अहिंसा भवन में हुई जीवन विज्ञान से व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास विषयक अध्यापकों की संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आज देश में बढ़ रही हिंसा, भ्रष्टाचार, नशाखेारी, अपराध आदि समस्याओं से सभी लोग त्रस्त हैं। जब तक शिक्षा के माध्यम से हम भावी पीढ़ी का चरित्र निर्माण करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएंगे तब तक इन समस्याओं से मुक्त होने की कल्पना करना निरर्थक है। इस दृष्टि से अध्यापकों को देश की भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का संकल्प लेना चाहिए।

डा. आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि जीवन विज्ञान व्यक्त्वि के सर्वांगीण विकास का एक ऐसा शिक्षा दर्शन है जिसमें नैतिक शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, अध्यात्म शिक्षा व योग शिक्षा का समन्वय है। लाडनूं आचार्य तुलसी जैसे महापुरुषों की जन्मभूमि है, जिनका जन्म शताब्दी वर्ष 2013-14 में मनाया जाएगा। जैविभा के कुलसचिव प्रो. जेपीएन मिश्रा ने कहा कि शिक्षा हमारे जीवन का अविभाज्य अंग है। आदर्श विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य राजूराम पारीक, शांतिलाल बैद ने भी विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी में आदर्श विद्या मंदिर सहित दर्जनों अध्यापक उपस्थित थे।
 
Copyright © 2011. JTN: Ladnun . All Rights Reserved
Company Info | Contact Us | Privacy policy | Term of use | Widget | Advertise with Us | Site map
Template modify by Creating Website. Inspired from CBS News