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Aug 23, 2012

लावासरदारगढ़ :संवत्सरी शुद्धता प्राप्त करने का मैत्री पर्व : साध्वी राकेश कुमारी

लावासरदारगढ़. २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
संवत्सरी शुद्धता प्राप्त करने का मैत्री पर्व है। इस पर्व का संयम की आराधना कर स्वागत करें। कटु व्यवहार और इस तरह के वचनों से सदैव दूर रहने का प्रयास करने की जरुरत हैं। साध्वी राकेश कुमारी ने यह बात तेरापंथ सभा भवन में आयोजित संवत्सरी पर्व के अवसर पर कही। उन्होने कहा कि आज हमें आत्म अंकेक्षण और आत्मावलोकन करने की जरुरत है। पिछले वर्ष में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रुप से हुई गलतियों के लिए तो हम खमत खामना कर लेंगें लेकिन आने वाले समय में कुछ अच्छा करने का प्रयास करें। हमें आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी पीढ़ी को हमारी संस्कृति के अनुरुप ढालने का प्रयास करें। इस अवसर पर साध्वी विपुलयशा व साध्वी मलयविभा ने भी संवत्सरी पर विस्तार से विचार रखें।

केलवा : पर्युषण महापर्व का मुख्य दिवस संवत्सरी : साध्वी गुणमाला

केलवा. २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो

पर्युषण महापर्व का मुख्य दिवस संवत्सरी दिवस है। यह बात साध्वी गुणमाला ने तेरापंथ सभाभवन संवत्सरी दिवस पर कही। साध्वी श्रीजी ने उपवास का प्रत्याख्यान करवाया। केलवा के अतिरिक्त पड़ासली, आत्मा, बिनोल, उदयपुर, चारभुजा आदि क्षेत्रों के लोगों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। साध्वी गुणमाला ने साधना के साढ़े बारह वर्ष को सविस्तार बताया। इस दौरान तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष ललित मेहता ने आभार एवं मंत्री हस्ती कोठारी ने संचालन किया। अध्यक्षता चतरमल बोहरा ने की, मुख्य अतिथि विनोद गांग थे। कार्यक्रम में लक्की कोठारी, ललित बोहरा आदि मौजूद थे।

पाली :क्षमा वीरयस्य भूषणं : साध्वी लब्धिश्रीजी

क्षमा वीरयस्य भूषणं : साध्वी
पाली २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
पाली में तपस्वियों का किया सम्मान :
मंडिया रोड स्थित तेरापंथ सभा भवन में साध्वी लब्धिश्रीजी, साध्वी मानकुमारी व साध्वी शशिप्रभा के सानिध्य में संवत्सरी पर्व मनाया गया। सुबह आगम वाचन के बाद साध्वी ने भगवान महावीर के 27 भव और जीवन दर्शन सरस रागिनियों के साथ रोचक प्रस्तुतिकरण किया। शाम को आयोजित कार्यक्रम में जैन धर्म के आचार्यो के शब्दचित्र को साध्वियों द्वारा चित्रांकित किया गया। तपस्या करने वाले प्रमिलादेवी, मुकेश वैदमुथा, श्रद्धा गोगड़, सीमादेवी, हेमराज, सुमित्रा, रामादेवी, विमलादेवी, डिंपलदेवी, मैना, रेखा, आशा, लता, मनीषा, मानकंवर आदि का बहुमान किया गया।

राजसमंद. मानवीय संस्कृति का पर्व है संवत्सरी : मुनि जतनकुमार

मानवीय संस्कृति का पर्व है संवत्सरी
राजसमंद. २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
भिक्षु बोधि स्थल में मुनि जतनकुमार एवं मुनि आनंद कुमार के सान्निध्य में पर्युषण पर्व का अंतिम दिन त्याग, तपस्या, संयम के साथ संवत्सरी महापर्व के रूप में म
नाया गया। मुनि जतन कुमार ने कहा कि मानवीय संस्कृति का पर्व है। वस्तुत: इस पर्व का नाम पर्युषण है। भगवान महावीर के चातुर्मास के 70 दिन बाकी रहने पर पर्युषण पर्व की अराधना की जाती है।

मुनि ने कहा कि पर्युषण का अर्थ है परि उपसर्ग, वस धातु और अन प्रत्यय। इन तीनों के संयोग से पर्युषण शब्द निष्पक्ष होता है। जिस प्रकार बलवान पर धावा बोलने के लिए बल का संचय करना आवश्यक है, इसी प्रकार राग आदि शत्रुओं की घात के लिए लिए सात दिन आध्यात्मिक बल संग्रहण के समझने चाहिए। मुनि आनंद कुमार ने आध्यात्मिक गीत सुनाया।

रतनगढ़ :क्षमा का महापर्व है संवत्सरी : साध्वी रामकुमारी लाडनूं

रतनगढ़. २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
क्षमा का महापर्व है संवत्सरी। ये विचार गोलछा ज्ञान मंदिर में साध्वी रामकुमारी लाडनूं ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत धर्म प्रधान देश है, जहां समय-समय पर अनेक पर्व आते हैं। उसी के तहत जैन धर्म का सबसे बड़ा पर्व संवत्सरी है, जो त्याग, जप, तप, सामयिक, स्वाध्याय के साथ मनाया जाता है। साध्वी कीर्ति प्रभा ने संवत्सरी पर्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रभावक आचार्यों के जीवन के बारे में बताया। साध्वी प्रज्ञावति ने अवसर्पिणी काल के 10 आश्चर्य काल बताए। साध्वी मयंक यशा ने भगवान महावीर के साधना काल पर विस्तार से प्रकाश डाला।

पडि़हारा : आत्म अराधना का पर्व है संवत्सरी : साध्वी धर्म प्रभा

आत्म अराधना का पर्व है संवत्सरी

पडि़हारा २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
संवत्सरी तप, साधना, क्षमा, मैत्री व आत्म अराधना का पर्व है। ये विचार साध्वी धर्म प्रभा ने महिला मंडल सभागार में हुई धर्म सभा में व्यक्त किए। कार्यक्रम को साध्वी संयम लता ने भी संबोधित किया। संचालन साध्वी मार्दवश्री ने किया। कार्यक्रम में सुमेरमल सुराणा, रतन जैन, धर्मचंद गोलछा, लक्ष्मीपत, कन्हैयालाल, संपतमल सुराणा, मंजू दूगड़, बसंती देवी, कुमारी मंजू सुराणा उपस्थित थीं। साध्वी धर्म प्रभा के सानिध्य में पर्युषण पर्व के तहत 14 से 21 अगस्त तक अखंड जप व तपस्या भी चली।

सुजानगढ़ २२ अगस्त २०१२ : अहिंसा और शांति की जरूरत : साध्वी राजीमती


सुजानगढ़ २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
दस्साणी भवन में साध्वी राजीमती के सानिध्य में पर्युषण पर्व का समापन संवत्सरी महापर्व के रूप में मनाया गया। साध्वी राजीमति ने ने श्रावक समाज को बताया कि भगवान महावीर करूणा मय थे, जिन्होंने अनेक कठिन तपस्याएं करके मानव समाज को शांति और अहिंसा का संदेश दिया जो आज भी प्रासंगिक है। साध्वी ने कहा कि मानव जीवन कई तरह के उतार चढ़ाव से गुजरता है, जिसमें अहंकार पर विजय पाने वाला जीव संपूर्ण जीवन में सुख भोगता है व आगम निगम के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है। इस दौरान अजय चोरडिय़ा, विजयसिंह बोरड़, तनसुख लोढ़ा, बाबूलाल फुलफगर, रविंद्र लोढा, संजय बोथरा, तनसुख बैद, सुनीता भूतोडिय़ा, सुशीला बैद व धर्मेंद्र फुलफगर मौजूद थे।


दस्साणी भवन में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन अणुव्रत चेतना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में साध्वी राजीमती ने कहा कि वर्तमान दौर में अणुव्रत की महत्ती आवश्यकता है। अगर हम अणुव्रत को पहचान लें तो हमारी बहुत सी कठिनाइयां समाप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि सच्चा अणुव्रती वही है जो व्यसन मुक्त जीवन बिताए इससे पूर्व महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

छापर : संवत्सरी को आत्म सन्निधि का पर्व :मुनि सुमेरमल सुदर्शन

छापर. २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
भिक्षु साधना केंद्र में मुनि सुमेरमल सुदर्शन के सानिध्य में संवत्सरी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में मुनि ने संवत्सरी को आत्म सन्निधि का पर्व बताते हुए कहा कि संसार में अनेक पर्व मनाए जाते है, ले
किन संवत्सरी जैसा पर्व कहीं नहीं मनाया जाता। उन्होंने श्रावक समाज को धर्म की आराधना करने की बात कहते हुए कहा कि श्रावक ऐसे होते है जो संतों के दर्शनों के बिना मुंह में पानी नहीं डालते। धर्मसंघ के जनसम्पर्क प्रभारी मुनि जयंत कुमार ने कहा कि संवत्सरी महापर्व सामुदायिक जीवन जीने की कला का महाग्रंथ है, जिसे सबको पढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर सांप्रदायिकता से सीख लेकर ही परिवारों के विघटन को रोका जा सकता है तथा देश में फैली क्षेत्रीय हिंसा पर काबू पाया जा सकता है। कार्यक्रम में मुनि तन्मय कुमार व मुनि अनुशासन कुमार ने आगम का वाचन किया। सादुलपुर. सेठिया अतिथि भवन में पर्युषण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया। समणी निर्देशिका ज्योतिप्रज्ञा ने कहा कि व्यक्ति को जब भी समय मिले, ध्यान लगाना चाहिए। समणी मानस प्रज्ञा ने भी विचार व्यक्त किए। अरिहंत कोचर ने बताया कि रात को दस का दम प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता में विजेता प्रतियोगियों को समाजसेवी चंपालाल घोड़ावत व जीवनमल धाड़ेवा की ओर से पुरस्कृत किया गया।

चूरू :संवत्सरी पर अहिंसा और शांति का संदेश : २२ अगस्त २०१२

संवत्सरी पर अहिंसा और शांति का संदेश
चूरू २२ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
जिले में तेरापंथ समाज की ओर से पर्युषण पर्व को लेकर मंगलवार को संवत्सरी पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया।

जिला मुख्यालय पर कमल कुंज में संवत्सरी महापर्व पर हुए समारोह में साध्वी ललित प्रभा ने महावीर स्वामी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिंसा, संयम और तप के मार्ग पर चल कर ही व्यक्ति जीवन मृत्यु के बंधन से मुक्त हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान किशोर व कन्या मंडल के बच्चों ने भगवान महावीर के जीवन पर आधारित लघु नाटिका की प्रस्तुति दी।


इसी क्रम में शायरदेवी की छह की दिन की निराहार तपस्या का प्रत्याख्यान व अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में छतरसिंह डागा, सुरेंद्र पारख, प्रकाश कोठारी, डूंगर मल कोठारी, पवन नाहटा, अजय दफ्तरी, सुरेश सरावगी, बच्छराज बांठिया थे।

Aug 20, 2012

नाथद्वारा :भक्ति प्रतियोगिता में झलका उत्साह :१८ अगस्त २०१२

नाथद्वारा १८ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
साध्वी शांता कुमारी के सानिध्य में स्थानीय तेरापंथ सभा भवन में गुरूवार रात को भक्ति संध्या प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि नगर पालिका अ
ध्यक्ष गीता शर्मा एवं निर्णायक राष्ट्रीय कवि गिरिश विद्रोही तथा साहित्यकार एमडी कनेरिया थे। इस दौरान कवि गिरिश विद्रोही ने 'हीरो के पारखी आप जैसे न रहेंगे तो सारे मोतियों को कव्वे चुग जाएंगे'। इस दौरान काफी संख्या समाजजन उपस्थित थे। तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष राकेश कोठारी ने बताया कि प्रतियोगिता में विमला वागरेचा प्रथम, प्रिया बाफना द्वितीय एवं कीर्ति कोठारी तृतीय रही। विजेताओं को परिषद द्वारा पुरस्कार वितरित किया गया। संयोजन निर्मल छाजेड़ एवं लोकेश बाफना ने किया।

राजसमंद : निर्मल हो तो वाणी भी औषधि के समान: १८ अगस्त २०१२

राजसमंद १८ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
पर्युषण का चौथा दिन शुक्रवार को वाणी संयम दिवस के रूप में मनाया गया। भिक्षु बोधि स्थल में आचार्य महाश्रमण के शिष्य मुनि जतन कुमार लाडनू और मुनि आनंद कुमार कालू के सानिध्य में कार्यक्रम हुए। कार्यक्रम में मुनि जतन कुमार ने वचन की महत्ता बताई, उन्होंने कहा कि वचन किसी भी व्यक्ति के लिए औषधी के समान हो सकता है और किसी के लिए घाव करने वाला भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि वाणी में ऐसी ताकत है जो आग भी लगा सकती है और शांत भी कर सकती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को दूसरे के साथ मधुर भाषा का प्रयोग करना चाहिए।इस दौरान उन्होंने भगवान महावीर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। मुनि आनंद कुमार कालू ने 'ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए'... दोहे के बारे में बताया और अच्छी वाणी बोलने पर जोर दिया। मुनि ने कहा कि वाणी की मधुरता दिलों को जोड़ती है और कटुता होने पर मित्र को भी शत्रु बना देती है। इस दौरान भिक्षु स्थल के मंत्री अशोक कुमार डूंगरवाल व राजकुमार दक ने भी विचार व्यक्त किए।

Aug 15, 2012

सुरत: असंयति दान लौकिक धर्म है -मुनि श्री सुरेश कुमार हरनावा:१५ अगस्त २०१२

असंयति दान देना लौकिक धर्म है -मुनि श्री सुरेश कुमार जी हरनावा
सुरत १५ अगस्त २०१२ जैन तेरापंथ न्यूज ब्योरो
सुरत शहर तेरापंथ भवन में आज दोपहर २ से ३ बजे तक आध्यात्मिक प्रवंचन में आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्ववान संत मुनि श्री सुरेश कुमार जी हरनावा ने दान पुन्य के विषय में बताते हुए आचार्य भिक्षु के मत को स्पष्ट किया की असंयति को दान देना धर्म नहीं यह एक सामाजिक कर्तव्य है . यह लौकिक धर्म है . मुनि श्री ने एक घंटे तक दिए अपने आध्यात्मिक प्रवचन में कहा की हर व्यक्ति को आगम का गहन अध्यन करना चाहिए ताकि श्रावक समाज जैन धर्म के मत को दुसरो के सामने उत्तम तरीके से रख सके . मुनि श्री ने कई बार आचार्य श्री तुलसी एवं आचार्य भिक्षु को याद किया .

Aug 12, 2012

किशनगंज :संघ के दायित्व पर समणी निर्देशिका अक्षयप्रज्ञा जी : 06.08.12

किशनगंज : स्थानीय तेरापंथ भवन में रविवार को विश्वसंत महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रवण जी की विदूषी समणी निर्देशिका अक्षय प्रज्ञा जी ने संघ व संघ के प्रति हमारा क्या दायित्व है, के विषय पर अपने विचारों को रखा.
इस कार्यक्रम का आयोजन नेपाल व बिहार के तेरापंथ समाज के लोगों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम का नाम साधार्मिक सम्मेलन रखा गया.
इस मौके पर बिहार के मंत्री भैरूदान जी भूरा, अखिल भारतीय युवक परिषद के सहमंत्री अमितजी नाहरा, महासभा के कार्य कारिणी सदस्य नेमचंद वैद, नरेंद्र जी वैद, छतरजी सेठिया, पंकज डागा आदि ने भी अपने-अपने विचारों को रखा.
इस मौके पर किशनगंज व गुलाबबाग के महिलामंडल ने सामूहिक गीत प्रस्तुत किये. जबकि कार्यक्रम को सफल बनाने में किशनगंज सभा युवक परिषद, महिला मंडल व किशोर मंडल ने अपनी भूमिका निभायी.

धूरी : ईष्या की भावना परिवार टूटने की वजह : 05 Aug 2012

धूरी (संगरूर)
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ व तेरापंथ युवक परिषद की ओर से शांति दूत आचार्य श्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनि अर्हत कुमार के सान्निध्य में टूटते रिश्ते बिखरते परिवार विषय पर स्थानीय सनातन धर्म आश्रम में सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में एसडीएम धूरी राजेश त्रिपाठी मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। कार्यक्रम में एक नाटक द्वारा आज की युवा पीढ़ी को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बुढ़ापे में माता-पिता को अलग करने की सजा इसी जन्म में भुगतनी पड़ती है।
इस दौरान मुनि भरत कुमार ने रिश्तों के टूटने व परिवारों के बिखरने के लिए ईष्या, बदले की भावना, सहनशीलता व संस्कारों की कमी को मुख्य कारण बताया, जबकि मुनि अर्हत कुमार ने इस समस्या के हल के लिए बचपन से ही बच्चों को संस्कारी बनाने व नैतिक मूल्य सिखाने पर जोर देने की बात कही। इस अवसर पर एसडीएम राजेश त्रिपाठी ने मुनियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुनि जी के संदेश ही इस जटिल समस्या को समाज से खत्म कर सकता है।
इस अवसर पर जय माता वैष्णो सेवा समिति की ओर से जूतों की संभाल सेवा निभाई गई। सेमिनार में पंजाब प्रांतीय तेरापंथ सभा के प्रधान महेन्द्र गुप्ता, एपी सोलवेक्स के डायरेक्टर पवन सिंगला, तेरापंथ सभा धूरी के प्रधान ओम प्रकाश गोयल, तेरा पंथ युवक परिषद के प्रधान सुरिंदर जैन, महासचिव अशोक जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।

पीलीबंगा : धागे में पिरोई हुई सूई के समान होता है ज्ञान August 7, 2012

पीलीबंगात् | आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी शिष्या साध्वी सुमन श्री के सानिध्य में मंगलवार को तेरापंथ महिला मंडल एवं तेरापंथ सभा के संयुक्त तत्वाधान में तेरापंथ भिक्षु प्रश्न मंच, श्रावक संबोध एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए साध्वी सुमन श्री ने कहा कि ज्ञान धागे में पिरोई हुई सूई के समान है, जो गुम होने पर भी मिल सकती है। इस अवसर पर श्रावक संबोध प्रतियोगिता में श्रीमती दुग्गड़ व ऊषा जैन प्रथम स्थान पर रहीं, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में पिंकी बांठिया, रचना पुगलिया, गुलाब सुराणा व सायर बांठिया ने प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को तेरापंथ सभा के अध्यक्ष डूंगरमल दुग्गड़ व महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती विनोद छाजेड़ ने सम्मानित किया। कमलाबाई दफ्तरी ने मंडल द्वारा जैन जीवन शैली की शानदार प्रस्तुति देने वाली कन्या मंडल की सदस्याओं को पुरस्कृत किया।

गंगाशहर : प्रतिक्रमण प्रशिक्षण कार्यशाला August 5th, 2012

बीकानेर। तेरापंथ महिला मण्डल एवं तेरापंथ युवक परिषद गंगाशहर के संयुक्त तत्वावधान में मुनि राजकरण, मुनि नगराज के सान्निध्य में ‘प्रतिक्रमण प्रशिक्षण कार्यशालाÓ का आयोजन तेरापंथ भवन गंगाशहर के प्रज्ञा समवसरण में किया गया। कार्यशाला के मुख्य वक्ता युवक रत्न राजेन्द्र सेठिया थे एवं प्रशिक्षक उपासक सूर्यप्रकाश सामसुखा थे। कार्यशाला की शुरुआत महिला मण्डल के मंगलाचारण के साथ हुई। महिला मण्डल अध्यक्ष संतोष बोथरा ने स्वागत व परिचय दिया। कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए मुनि राजकरण ने कहा कि ‘प्रतिकमण पापों के शोधन की प्रक्रिया है और जैन साधना की विशिष्ट पद्धति है यह प्रतिक्रमण द्रव्य रूप में नहीं भाव प्रतिक्रमण होना चाहिए।Ó सभी प्रशिक्षणार्थियों को चाहिए कि वे निरन्तर इसका प्रयोग करें। चिन्तन मनन करें तथा अपने किसी भी अकरणीय कार्यों के लिए प्रतिक्रमण के माध्यम से प्रायश्चित स्वीकारें।Ó कार्यशाला के मुख्य वक्ता राजेन्द्र सेठिया युवक रत्न ने कहा कि जैन अगमों के आधार पर प्रतिक्रमण ६ आवश्यकों में से महत्वपूर्ण आवश्यक है। यह एक आध्यात्मिक ही नहीं वैज्ञानिक पद्धति भी है जिससे व्यक्ति सहज, सरल विनम्र व संयमी बनता है। कार्यशाला के प्रशिक्षक उपासक सूर्य प्रकाश सामसुखा ने कहा कि हर व्यक्ति की आत्मा का नैसर्गिक स्वभाव मैत्री, प्रेम, करुणा व समता है, लेकिन विभिन्न कारणों आत्मा में क्रोध लोभ, मान, माया आदि का समावेश होने से यह स्वभाव ‘विभावÓ में परिवर्तित हो जाता है। मूलरूप से विभाव से स्वभाव की ओर लौटने की प्रक्रिया का नाम ही प्रतिक्रमण है। कार्यशाला के दौरान मुनिश्री श्रेयांस कुमार ने गीतिका व मुनिश्री पीयूष कुमार तथा मुनिश्री मलयज कुमार ने अपने वक्तव्य से प्रतिक्रमण के महत्व पर प्रकाश डाला। आंगतुकों के लिए अभिनंदन पत्र का वाचन तेयुप के उपाध्यक्ष मनोज सेठिया ने किया। अतिथियों व किट सौजन्यकर्ता ईमानमल बोथरा का सम्मान पानमल नाहटा, राजेन्द्र बोथरा, संतोष बोथरा, धर्मेन्द्र डाकलिया, मधु छाजेड़ ने किया। विभिन्न परीक्षाओं में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिला मण्डल सदस्यों का मोमेंटों भेंटकर सम्मान राजेन्द्र सेठिया व सूर्यप्रकाश सामसुखा ने किया। तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष राजेन्द्र बोथरा ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन तेयुप मंत्री मनीषा बाफना ने किया। कार्यशाला को सफल बनाने में कार्यशाला प्रभारी शारदा बैद, अरिहन्त नाहटा, जयश्री भूरा, मनीष छाजेड़ का योगदान रहा। तेरापंथ दर्शन परीक्षा में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली संगीता भंसाली का सम्मान किया गया। आगामी चरणा में संभागियों ने राजेन्द्र सेठिया व सूर्यप्रकाश सामसुखा ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

Apr 26, 2011

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